नई बातें / नई सोच

Wednesday, October 08, 2008

ख़ुदा से मिलो

राम कहानी - रहीम की ज़बानी


ऐश्वर्य और सुनीता


विश्व एड्स दिवस + एशियन गेम्ज़ दुहा 2006


ख़ुदा को नींद आगई


ईराक की सडकों पर नाचती मौत


स्वर्ग मे बाथरूम नहीं….


हिन्दू मुसलिम भारत और ख़ुदा


मैदान मे ख़ुदा


स्मझोता पर ख़ुदाई एक्सप्रेस


फ़िलिस्तीनीयों से ताज़ा ख़ताब


पचासवीं कीश्त पर ख़ुदा रोना चाहा मगर


ख़ुदा की आख़िरी क़िस्त


राम अल्लाह के नाम पे वोट देदो बाबा


सागर को ख़ुदा का वासता


चौधवीं बर्सी (6 December 2006)


ख़ुदा का वेलंटाईन गिफ़्ट


ज़रूरत से ज़्यादा ख़ुदा (ख़ुदा की वापसी)


नवाज़ ने बेनज़ीर को मार दिया


बकरा ईद लाया


ख़ुदा को दांत नहीं!


ये खुदा है – 43


ये खुदा है – 41


ये खुदा है – 40


ये खुदा है – 38


ये खुदा है – 37


ये खुदा है - 36


ये खुदा है - 35


ये खुदा है - 34


ये खुदा है - 33


ये खुदा है - 32


इनसे मिलो - 31


ये क्या बकवास है?


इनसे मिलो - 30


इनसे मिलो -29


इनसे मिलो - 28


नई बातें - नई सोच


इनसे मिलो - 24


अनोखी किस्तें


इनसे मिलो - 18


इनसे मिलो - 22


इनसे मिलो - 12


खुदा से मिलो

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Tuesday, September 30, 2008

ख़ुदा की वापसी



खुदा से ताज़ा मुलाक़ात

http://www.shuaib.in/chittha/archives/182

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Tuesday, September 09, 2008

ज़रूरत से ज़्यादा ख़ुदा












आने वाली किस्त
(अच्छे लोगों के अच्छे विचार)

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Monday, September 08, 2008

ख़ुदा की वापसी

पहले से अच्छा नेहला धुलाकर ख़ुदा को फिलहाल इस नये चिट्ठे पर लाया जा रहा है जो अबसे पहले यहां थे यानी http://shuaib.in/chittha (नई बातें / नई सोच) पर ज़बर्दस्त बड़बड़ाते रहे मगर इनका ब्लॉग अपग्रेड करते वक़्त बुरी तरह फिसल गिरे मगर शुक्र है दांत नहीं टूटे चूंकि दांत हैं ही नहीं। पुराना ब्लॉग ठीक होने तक इस नये चिट्ठे पर ही बहुत ज्लद अपनी नई चाल ढाल यानी करामात यानी नई बातों और नई सोच के साथ इस हिन्दी चिट्ठाजगत मे एकबार फिर हंगामाखैज़ तौर पर ख़ुदा हाज़िर होने वाले हैं। जारी

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Saturday, July 15, 2006

इनसे मिलो - 22

ये खुदा है

सददाम अदालत मे खडे बड बडाने लगेः जब हम ईराक के राष्ट्रपति थे इज़राईल हमारे सामने एक चूहे की तरह था और आज हम पिंजरे मे तो वोह शेर बन गया। खुदा ने सददाम की बात सुनी तो उन्हें तसल्ली दीः ऐसी हालत मे बहकी बहकी बातें ना करे, अमेरिका ने अब तक आपको जो ज़िनदा रखा उस पर शुक्र करें। सीरिया से पता नही किस को शरारत सूझी, मिज़ाईल पर उसामा का फोटो लगाया और सीधा इज़राईल पर ठोका। मिज़ाईल तो फटा नही मगर उसामा की फोटो के नीचे अंग्रेज़ी मे लिखा थाः "I am in Syria, Catch me if you can" खुदा को गुस्सा तो बहुत आया पर किया करे? कहां कहां अपनी नज़र रखे? ईरान, ईराक, अफगान - अभी फिलिस्तीन को एक थप्पड लगाया तो पलट कर लेबनान को दिन मे सितारे दिखा दिए। खुदा सिर्फ उन्ही लोगों को पसंद करता है जो अमेरिका पर ईमान रखते हैं वोरना पाकिस्तान को नज़रे रेहमत से देखना खुदा को बिलकुल पसंद नहीं। मुशर्रफ हमेशा से कहते आरहे हैं कि मैं वरदी नही उतारूँगा, मगर उन्हें किया मालूम कि उनकी किस्मत मे कफन भी नही है, खुद पाकिस्तानी लोग हर दिन दुआ कर रहे हैं कि खुदा करे ज़ालिम मुशर्रफ को कफन भी नसीब न हो। सभी देशों की तरह आज भारत भी लेबनान के लिए अपनी तरफ से अफसोस भेजा। दूसरी तरफ सीरिया के राष्ट्रपति बषर अल असद ने अब बाथरूम भी अपने बेड के नीचे बनालिया है और उनका बेड कहां है खुदा को भी नही मालूम। लेबनान पर अचानक ईज़राईल की तोपबाज़ी से अमेरिका ने ये कहते होवे अपना मुंह छुपा लिया कि ये सब खुदा ने किया है जिसमे हमारा कोई हाथ नही, हमने तो बस खुदा से इतनी फ़रियाद की थी कि बेचारा इज़राईल इस वकत मुसीबत मे है उसकी मदद करे। खुदा तो खुदा है, वो जब चाहे किसी के भी कान खींच सकता है उधर फिलिस्तीन को आंख मार कर सुला दिया कि तुम्हें बाद मे देखेंगे क्योंकि अब लेबनान को जगाना है। -- जारी

बाकी फिर कभी

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Friday, July 14, 2006

इनसे मिलो - 12

ये खुदा है

हिन्दी ब्लॉग जगत मे आज कल आतंकवादीयों की टांग खींची जा रही है तो फिर मैं क्यों चुप रहूँ? लेकिन मेरा अन्दाज़ सबसे अलग है, आतंक के मामले मे मैं खुदा को भी नही बखश्ता। तो पेश है उर्दू से हिन्दी ट्रांसलेट मेरा एक पुराना लेख

मुजाहिदीन के सरदार मुल्ला बखश को ज़नजीरों मे जकडे खुदा के सामने हाज़िर किया, अमेरिका ने इलज़ामात लगाने शुरू किएः ये आदमी खुदा के नाम पर दंगा फसाद करवाता है, नौजवानों को भडका कर उनसे कतल-गारतगीरी करवाता है और फिर इस काम को खुदा खुशी कहता है और तो और अगर इसके चीले (मुजाहिद) पुलिस इनकॉनटर मे मारे जाएं तो उन्हें शहीद का नाम देता है। अमेरिका की बात सुन कर खुदा को हंसी आईः पता नही किस नमूने को उठा लाए? इसका हुलिया देखो ये कहां से मुजाहिद लगता है? चेहरे पर अजीब झुर्रियां, फटे पुराने कपडे, मैल भरे नाखून, सर पर गुंबद जैसी पगडी और छाती तक दाढी ये तो सौ फ़ीसदी फकीरों जैसा है। अमेरीका ने खुदा को याद दिलायाः मुजाहिदीन की यही पहचान है। ये लोग पहाडों, जंगल और खनडरों या फिर मज़ारों के आस पास बसेरा करते हैं। इतना सुनना था कि खुदा गज़ब मे अगयाः मेरी इज़्ज़त और जलाल की कसम! क्यों रे मुल्ला तेरी ये मजाल कि मेरे नाम पर दंगा फसाद और उस पर जिहाद का लेबल ---- अखिर ये कौनसा कारोबार है? अमेरिका ने खुदा से कहाः ये तो कुछ भी नही, उनके सबसे बडे सरदार उसामा आज भी फरार हैं। अचानक मुल्ला चीख पडाः हां मैं मुजाहिद हूँ, कसम खुदा की मुझे छोड दिया जाए वोरना मेरे मुजाहिदीन दुनिया को जला कर राख करदेंगे। मुल्ला की बात सुन कर खुदा खौफज़दा होगयाः अरे ये तो सच मुच मुजाहिद है और इसके अन्दर कूट कूट कर मुजाहिदाना जज़बात हैं फिर खुदा ने मुल्ला को गले लगाया और अपने पास बिठा कर उसके कान मे कहाः अगर उसामा का पता बतादे तो चार बोरी गांजा मुफ्त पाएगा। खुदा की बात सुन कर मुल्ला लालच मे अगया और सब कुछ सच सच बताने लगाः उसामा बेचारे तो अमेरिका के गुलाम और उसी के हुकम पर छुपे होवे हैं -- जारी है

बाकी फिर कभी

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Wednesday, July 12, 2006

खुदा से मिलो

मैं ने अपने उर्दू ब्लॉग पर "खुदा से मिलो" नामक अब तक 21 लेख पोस्ट किये हैं, जिसका मतलब है "खुदा अमेरिका का मेहमान" (America, the host of Lord) और उसी पार्ट का आठवां लेख यहां हिन्दी मे पोस्ट कर रहा हुँ। हुवा यूँ कि नया वर्ष 1 जनवरी 2006 के दिन दुनिया भर से खुदा के नाम नये वर्ष की मुबारकबाद पत्र भेजे और उसामा बिन लादिन ने भी खुदा के नाम पत्र और साथ ही अपना ताज़ा वीडियो भेजाः

खुदा ने मुबारकबादियोँ का आख़िरी पार्सल खोला तो उसामा का वीडियो पाया जिस मे वो बन्दूक थामे उनकी रिवायती खबरदार उंगली खुदा की तरफ थीः तमाम तारीफें अमेरिका के लिऐ जो बहुत ही गज़बनाक और दुनिया का चौकीदार है, वो इस लिऐ कि हमारा शक यकीन बन गया, खुदा के चाल चलन से साफ ज़ाहिर है वो भी अमेरिकी हामी है। अमेरिका को नज़रे रहमत से देखने वाले खुदा, इतना तो बतादे कि आखिर हमें कौनसा मज़हब इखतियार करना होगा? अपने को माता पिता की विरासत मे मज़हब मिला और मज़हबी तालीम हम पर फर्ज़ होगई और जब फारिग होये तो ज़हनियत ऐसी मनहूस हुई के दूसरे मज़हबी इनसानों से नफरत जगाली। लिबास तबदील किया, गले मे खारिश के बावजूद छाती तक दाढी छोडी फिर जन्नत मे सबसे आला मुकाम पाने के चक्कर मे जिहाद करने का पेशा अपनाया मगर इसके बावजूद आज तक हम बे इज़्ज़त रहे। दुनिया के सभी देश एक होकर हमें नाकों चने चबा रहे है, हम तस्व्वुर करते ही रह गये कि एक ना एक दिन गैबी इमदाद नसीब होगी मगर हमेशा मूँ की खानी पडी। दुनिया भर मे हमारे मुजाहिदीन को चुन चुन कर कुत्तों की तरह मार रहे हैं, इन मरे हुए मुजाहिदीन को शहीद कहते हुए शर्म आती है इनके चेहरे पहचानने लायक भी नहीं छोडते, शहीदों को जन्नत नसीब है मगर खुदा खुद अमेरिका मे जा बसा है। किस्से कहानियों मे हमेशा जिहाद की जीत लिखा है और हम ने जहां कहीं भी जिहाद किया रुसवाई नसीब हुई। काश आप खुदा कि बजाये एक मुजाहिद होते, क्योंकि एक मुजाहिद ही दूसरे मुजाहिद का दर्द समझता है। हम इस वकत बहुत ही कनफियोज़न का शिकार हैं, पहले तो अपने आपको बहुत बडा मुजाहिद समझ लिया, चंद लोगों ने होसला किया बढाया खुद को वालियों मे तस्व्वुर कर बैठे हमे किया मालूम था कि दुनिया वाले हमारे इस पवित्र पेशे को आतंकवाद सम्झते है? बडी मेहरबानी ज़रा बताऐँ कि आखिर ये कौनसा सिसटम है? कुछ समझ मे नहीं आरहा कि आखिर हमारी ज़िनदगी का किया मकसद है ------ (उसामा के आंसू निकल पडे और खुदा से कहने लगे) आपने हमें इनसानियत के अज़ीम मुकाम से निलाक कर मज़हब मे फेंक दिया फिर हम ने ऐसा कौनसा गुनाह किया कि जिहाद जैसे खून खराबा ग्रुप का लीडर बना दिया जहां रुसवाई शर्मिन्दगी और लाचारगी के अलावा आखिर मे बहुत बुरी मौत है ---- जब हमें मुजाहिद बना ही दिया तो जानवर बन्ने मे ज़्यादा देर नहीं, किया खाख ज़िनदगी पाई काश हमें जानवर ही बना देते या फिर इनसानों मे पैदा ही ना होते तो आज हमारी ये दुरगत ना बनती ------- (उसामा ने अपने आंसू पुंछे और खुदा की तरफ घूरते होवे कहा) इस वीडियो कैसेट से आज इकरार करता हूँ अमेरिका पर ईमान लाता हूँ और बाकी ज़िनदगी इनसानों की तरह जीना चाहता हूँ -- आगे और भी

बाकी फिर कभी

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